रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: "दिनों में सबसे बेहतरीन दिन जुमा का दिन है।" (अबू दाऊद)
जुमा की नमाज़ के लिए पाक-साफ होकर गुस्ल करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है।
दांतों की सफाई का खास ख्याल रखना और मिस्वाक करना।
जुमा के दिन अपने सबसे अच्छे और धुले हुए कपड़े पहनना मुस्तहब है (सफेद रंग अफज़ल है)।
बिना अल्कोहल वाला अच्छा अत्तर या तेल इस्तेमाल करना।
हाथ-पैरों के नाखुन काटना और तेल लगाना।
जुमा के लिए अज़ान से पहले या जल्दी पैदल मस्जिद की तरफ निकलना।
हदीस: जो जुमा के दिन सूरह कहफ पढ़ता है, उसके लिए दो जुमा के दरमियान नूर चमकता रहता है।
रसूलुल्लाह ﷺ पर जुमा के दिन खूब दुरूद-ओ-सलाम भेजना।
इमाम के खुतबे के दौरान पूरी तरह खामोश रहना और बातें न करना।
अस्र से मगरिब के दरमियान खास तौर पर खूब रो-रो कर दुआएं मांगना।