ज़िंदगी के हर मोड़ पर रहनुमाई करने वाले पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ के मुबारक फरमान:
"तमाम आमाल (कर्मों) का दारोमदार नीयत पर है, और हर इंसान को वही मिलेगा जिसकी उसने नीयत की।" (सहीह बुखारी)
"हलाल भी ज़ाहिर है और हराम भी ज़ाहिर है, और इन दोनों के बीच कुछ शक-ओ-शुबहे वाली चीज़ें हैं जिनसे बहुत से लोग वाकिफ नहीं होते। जो शुकूक से बचा उसने अपने दीन और इज़्ज़त को बचा लिया।" (सहीह मुस्लिम)
"दीन तो सिर्फ खैरख्वाही (अल्लाह, उसकी किताब, उसके रसूल और तमाम इंसानों की भलाई चाहने) का नाम है।" (सहीह मुस्लिम)
"तुममें से कोई शख्स उस वक्त तक सच्चा मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए भी वही पसंद न करे जो खुद अपने लिए पसंद करता है।" (सहीह बुखारी)
"जो शख्स अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अच्छी बात कहे वरना खामोश रहे।" (सहीह बुखारी)
एक शख्स ने अर्ज़ किया: 'मुझे कोई नसीहत फरमाएं', आप ﷺ ने फरमाया: "गुस्सा मत करो", उस शख्स ने बार-बार पूछा और आपने हर बार यही फरमाया: "गुस्सा मत करो।" (सहीह बुखारी)
"पाकीज़गी और सफाई आधा ईमान है।" (सहीह मुस्लिम)
"न खुद किसी को नुकसान पहुंचाओ और न किसी के नुकसान के बदले में उसे नुकसान पहुंचाओ।" (इब्ने माजाह)