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40 हदीस-ए-नबवी (इमाम नवीं संग्रह)

ज़िंदगी के हर मोड़ पर रहनुमाई करने वाले पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ के मुबारक फरमान:

हदीस 1: आमाल का दारोमदार नीयत पर है
إِنَّمَا الأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ، وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى
हिंदी तर्जुमा:

"तमाम आमाल (कर्मों) का दारोमदार नीयत पर है, और हर इंसान को वही मिलेगा जिसकी उसने नीयत की।" (सहीह बुखारी)

हदीस 2: हलाल और हराम बिल्कुल साफ हैं
إِنَّ الْحَلَالَ بَيِّنٌ وَإِنَّ الْحَرَامَ بَيِّنٌ وَبَيْنَهُمَا مُشْتَبِهَاتٌ
हिंदी तर्जुमा:

"हलाल भी ज़ाहिर है और हराम भी ज़ाहिर है, और इन दोनों के बीच कुछ शक-ओ-शुबहे वाली चीज़ें हैं जिनसे बहुत से लोग वाकिफ नहीं होते। जो शुकूक से बचा उसने अपने दीन और इज़्ज़त को बचा लिया।" (सहीह मुस्लिम)

हदीस 3: दीन खैरख्वाही (भलाई चाहने) का नाम है
الدِّينُ النَّصِيحَةُ
हिंदी तर्जुमा:

"दीन तो सिर्फ खैरख्वाही (अल्लाह, उसकी किताब, उसके रसूल और तमाम इंसानों की भलाई चाहने) का नाम है।" (सहीह मुस्लिम)

हदीस 4: मोमिन वह है जो दूसरों के लिए वही चाहे जो खुद के लिए चाहे
لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ
हिंदी तर्जुमा:

"तुममें से कोई शख्स उस वक्त तक सच्चा मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए भी वही पसंद न करे जो खुद अपने लिए पसंद करता है।" (सहीह बुखारी)

हदीस 5: अच्छी बात कहो या खामोश रहो
مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الآخِرِ فَلْيَقُلْ خَيْرًا أَوْ لِيَصْمُتْ
हिंदी तर्जुमा:

"जो शख्स अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अच्छी बात कहे वरना खामोश रहे।" (सहीह बुखारी)

हदीस 6: गुस्सा मत करो
لَا تَغْضَبْ
हिंदी तर्जुमा:

एक शख्स ने अर्ज़ किया: 'मुझे कोई नसीहत फरमाएं', आप ﷺ ने फरमाया: "गुस्सा मत करो", उस शख्स ने बार-बार पूछा और आपने हर बार यही फरमाया: "गुस्सा मत करो।" (सहीह बुखारी)

हदीस 7: पाकीज़गी आधा ईमान है
الطُّهُورُ شَطْرُ الإِيمَانِ
हिंदी तर्जुमा:

"पाकीज़गी और सफाई आधा ईमान है।" (सहीह मुस्लिम)

हदीस 8: न किसी को नुकसान पहुंचाओ न नुकसान उठाओ
لَا ضَرَرَ وَلَا ضِرَارَ
हिंदी तर्जुमा:

"न खुद किसी को नुकसान पहुंचाओ और न किसी के नुकसान के बदले में उसे नुकसान पहुंचाओ।" (इब्ने माजाह)