हदीस के मुताबिक जो शख्स इसे सुबह यकीन के साथ पढ़े और शाम से पहले इंतकाल कर जाए तो वह जन्नती है।
अल्लाहुम्मा अन्ता रब्बी ला इलाहा इल्ला अन्ता, खलक़्तनी व अना अब्दुका, व अना अला अहदिका व वा'दिका मस-तता'तु, अऊज़ु बिका मिन शर्री मा सनअतु, अबूउ लका बि-नि'मतिका अलैया, व अबूउ लका बि-ज़म्बी फग़फिर ली, फ-इन्नहू ला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अन्ता।
ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तूने ही मुझे पैदा किया और मैं तेरा बन्दा हूँ। मैं अपनी ताकत के मुताबिक तेरे अहद और वादे पर कायम हूँ। मैं अपने किए हुए आमाल की बुराई से तेरी पनाह मांगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमतों का इकरार करता हूँ और अपने गुनाहों का एतराफ करता हूँ, इसलिए मुझे माफ फरमा दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ नहीं कर सकता।