जनाज़े की नमाज़ फ़र्ज़-ए-किफ़ाया है (इसमें रुकू और सजदा नहीं होता)
अल्लाहुम्मग़-फ़िर लि-ह़य्यिना व मय्यितिना व शाहिदिना व ग़ाइबिना व सग़ीरिना व कबीरिना व ज़करिना व उनसाना। अल्लाहुम्मा मन अह़-यैतहू मिन्ना फ-अह़यिही अलल इस्लाम, व मन तवफ्फ़ैतहू मिन्ना फ-तवफ़्फ़हू अलल ईमान।
ऐ अल्लाह! हमारे ज़िन्दों को, हमारे मुर्दों को, हमारे हाज़िर और गायब लोगों को, हमारे छोटों और बड़ों को, और हमारे मर्दों और औरतों को बख्श दे। ऐ अल्लाह! तू हममें से जिसे ज़िन्दा रखे उसे इस्लाम पर ज़िन्दा रख, और जिसे मौत दे उसे ईमान पर मौत दे।
अल्लाहुम्मज-अलहु लना फ़रतन वज-अलहु लना अजरंव-व ज़ुखरन वज-अलहु लना शाफ़िअव-व मुशफ़्फ़आ।